छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के पूर्व अध्यक्ष बाफना भाजपा नेता के समय एक ऐतिहासिक फैसला लिया गया जिसमें छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल की स्वयं संचालित इकाइयों में नेताओं जनप्रतिनिधियों माननीय संसाधन माननीय विधायक और पर्यटन मंडल के पूर्व अध्यक्ष तथा पूर्व उपाध्यक्ष को स्वयं के उपभोग करने पर केवल कक्षा आरक्षण कराए जाने पर कक्षा का किराया दरों में दी जाने वाली छूट 50% तक की गई । वहीं पर्यटन मंडल में कार्यरत अधिकारियों कर्मचारियों को उनके नाती पोते रिश्तेदारों को मांगलिक कार्यों के लिए कमरो या लॉन आदि के इस्तेमाल के लिए 30% की छूट दी गई है । इस तरह आम आदमी की सुविधा के लिए बनाया गया रिजॉर्ट उसकी पहुंच से दूर होता प्रतीत होता है। यदि माननीय गण कमरों का आरक्षण करवाते हैं तो आम आदमी का किया हुआ आरक्षण कैंसिल भी कर दिया जा सकता है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि वर्तमान संचालक महोदय इसके प्रति बहुत कठोर हैं और रिसोर्ट का बेजा इस्तेमाल काफी हद तक कंट्रोल में है । हाल ही में कवर्धा के भोरमदेव जंगल सफारी के लिए पिछले रविवार उद्घाटन करने गए वन मंत्री केदार कश्यप के लिए सरोदा दादर मैं आरक्षित कमरों का भुगतान डीएफओ कवर्धा से वसूल कर लिया गया । वहीं गवर्नर महोदय के लिए भी पूर्व में आरक्षित कमरों का भुगतान कलेक्टर , कवर्धा और जशपुर से वसूल किया गया । वैसे इन रिजॉर्ट के संचालन में लगे आउटसोर्सिंग के मैनेजर कमरों को बिना रिजर्वेशन दे भी देते हैं और कभी-कभी घंटे भर के लिए उपलब्ध भी करा देते हैं। इस बात के भी सैकड़ो प्रमाण आ चुके हैं । कभी-कभी पर्यटकों को सीमेंटेड कमरों से वुडेन कॉटेज में शिफ्ट /अपग्रेड तो कर दिया जाता है लेकिन उसके अंतर की राशि चुपचाप यह आउटसोर्सिंग के मैनेजर डकार लिया करते हैं । ताज्जुब की बात है कि इस पर परिचालन विभाग का कोई कंट्रोल नहीं है । दरअसल ये आउटसोर्सिंग मैनेजर किसी मंत्री , अध्यक्ष , उपाध्यक्षों ,या अधिकारीयों के कृपापात्र होते हैं और किसी विभागीय अधिकारी से डरते या कंट्रोल में नहीं रहते। वे जानते हैं की कोई उनका कुछ नहीं बिगड़ सकता। जरूरत बात की है की सभी पर्यटन विभाग संचालित रिसोर्ट के मैनेजर आउटसोर्सिंग के न होकर पर्यटन विभाग के स्थाई कर्मचारी होने चाहिए जिससे उन पर किसी भी तरह की गड़बड़ी और वित्तीय अनियमितताओं के खिलाफ शिकंजा कसा जा सके ।।