Monday, June 1st, 2026

आखिर अन्ना रिटायर कर गए, अनुत्तरित सवालों की फेहरिस्त छोड़ गए ।।

वन विभाग के वन बल प्रमुख श्री वी श्रीनिवास राव आखिर अपने ओहदे से रिटायर कर गए । अपने सेवा काल का अधिकतर समय उन्होंने बस्तर में ही बिताया । बस्तर के लोग उन्हें अन्ना के नाम से जानते थे, आज भी वन विभाग के छोटे-बड़े कर्मचारी उन्हें इसी नाम से संबोधित करते हैं।। छत्तीसगढ़ में जब रायपुर वन मंडल नॉर्थ और साउथ हुआ करता था तो अन्ना साउथ रायपुर के डीएफओ बनकर धमतरी से अपना सफर शुरू किया और धीरे-धीरे वन विभाग में मजबूत पकड़ बनते चले गए ।


अपने मातहत कर्मचारियों और उच्च अधिकारियों, व्यापारियों , नेताओं, मंत्रियों, और छूट भइयों , दलालों , यहां तक कि पत्रकारों को भी अन्ना संतुष्ट करने में माहिर रहे । कुल मिलाकर उनका मैनेजमेंट जग जाहिर और धीरे-धीरे प्रभावित होता गया । राजनीतिक पार्टियों की नब्ज पकड़ना भी अन्ना बखूबी जानते थे लिहाजा हमेशा की पोस्ट पर बने रहे । पर अपने धमतरी वन मंडल अधिकारी के पद पर रहते हुए वह संभवत पहले ऐसे घोटाले में गिर गए जिसकी गूंज विधानसभा के साथ-साथ राष्ट्रीय पटल तक भी बारंबार गूंजती रही । कांग्रेस कार्यकाल के अंतिम चरण में छत्तीसगढ़ का आरा मिल् घोटाला सत्ता परिवर्तन के साथ ही सुर्खियों में आया और भारतीय जनता पार्टी द्वारा उजागर कर दिया गया । सभी जानते हैं कि इसकी मलाई रोगी जी खा गए और तत्कालीन वन संरक्षक श्री राकेश चतुर्वेदी श्री एस एस डी बड़गइयां वी श्रीनिवास राव हेमंत पांडे और अमरनाथ प्रसाद बेवजह ही इसकी चपेट में आ गए ।आश्चर्य की बात तो यह है कि कालांतर में इस पूरे घोटाले से अन्ना सबसे पहले बरी कर दिए गए । बाकी अधिकारियों को क्लीन चिट लेने में तलवे घीस गए । सवाल आज भी अनुत्तरित है । तत्कालीन सी एस बैजन कुमार ने आखिर कौन सी घुट्टी पी के उन्होंने अन्ना को सबसे पहले बरी कर दिया ।
बहरहाल अब सब बरी हो चुके हैं और अन्ना भी वन बल प्रमुख के सिंहासन तक पहुंचकर रिटायर कर चुके हैं पर अभी भी उनसे जुड़े ऐसे अनेकों सवाल अनुत्तरित ही रह गए हैं ।।वर्तमान में सबसे बड़ा सवाल ये है कि उन युवा छात्रों का क्या जो वनरक्षक बनने का सपना आँखों में संजोय बैठे हैं. . पूर्व विधानसभा अध्यक्ष माननीय धर्म लाल कौशिक ने भी इस मामले को विधानसभा में उठाया था उन्होंने आपत्ति दर्ज कराई थी कि वनरक्षक भरती में 1500 पदों के लिए लगभग डेढ़ लाख छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ किया गया है।


इसके बाद दिनांक 11 नवंबर 2025 को छत्तीसगढ़ शासन के वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग मंत्रालय महानदी भवन नया रायपुर अटल नगर के पत्र क्रमांक 12760 के माध्यम से श्री श्रीनिवास राव प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बाल प्रमुख छत्तीसगढ़ को इस आशय से भेजा गया कि वनरक्षक भर्ती नवंबर 2024 में वन विभाग प्रमुख श्री श्रीनिवास राव के द्वारा अनियमितता , षड्यंत्र एवं भ्रष्टाचार की जांच के संबंध में शिकायत मिली है . इसका जवाब अन्ना को दो सप्ताह के भीतर शासन को भेजना था जो लगभग दो माह बाद भेजा गया वह भी गोलमोल उत्तर के साथ।

फिलहाल बकौल विभागीय मंत्री यह पूरी प्रक्रिया अब व्यापम के अधीन है और व्यापम संभावतः उन अभ्यर्थियों की परीक्षा 2027 में ले पाएगा तब तक यानी लगभग भर्ती प्रक्रिया के शुरू होने से 3 साल बाद तक युवाओं को वनरक्षक पद के लिए तरसना पड़ सकता है और न जाने कितने युवा किसी और छोटी-मोटी नौकरी में लगे हुए होंगे। बहरहाल अन्ना रिटायर होकर फुर्र हो गए हैं

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *