👉👉👉आज सरकार में बैठे अधिकारी कर्मचारी मोटी तनख्वाह पाने के बाद भी पैसों की हवस में भ्रष्टाचारी आचरण अंगीकार किये जी रहे हैं , ऐसे में ईमानदारी के राह में चलने वाले मुसाफिर विरले ही होते हैं।
कल १५ जून २०२६ को भनपुरी चौक रायपुर के पास प्रधान आरक्षक-आशुतोष नेताम क्रमांक:- 691 पॉइंट ड्यूटी कर यातायात संचालन कर रहे थे……..उन्हें एक बैग लावारिस हालत में सडक पर मिला। जब उन्होंने इसे चेक किया तो उसमे 11,700 रु नगद एवं सोने चांदी के जेवरात , लगभग 4 तोला के आसपास थे ….
फिर क्या था… उस प्रधान आरक्षक को याद आ गया वो दिन जिस दिन उसने शपथ लेकर वर्दी अपने तन पर पहनी थी…
उसे याद आ गया की कई जवानों की तस्वीरें अमर्यादित आचरण में लिप्त सोशल मिडिया मे अक्सर प्रसारित हो जाती है और कभी कभी बेवजह भी प्रसारित की जाती हैं …
उसे याद आ गया की वो उसी छत्तीसगढ़ पुलिस का अहम् हिस्सा है जिसे अदम्य साहस के लिए राष्ट्रपति ध्वज सम्मान मिला है , जिसे गर्व से हम सभी वर्दी मे दाहिने सीने पर पहनते हैं…
उसे याद आ गया की उसके माता पिता ने सिर्फ उसे पाला नहीं बल्कि उसे अच्छी परवरिश कर ईमानदारी की घुट्टी भी दी है…
उन्होंने बैग में आधार कार्ड के दिए हुए नंबर से संपर्क कर बैग की मालकिन महिला को भनपुरी यातायात थाना बुलाकर सुपुर्द नामा में दिया और ईमानदारी की अनूठी मिसाल पेश की …..
आशुतोष नेताम की ईमानदारी को सल्यूट…. 🙏 साधुवाद
जय हिन्द, जय छत्तीसगढ़..