Thursday, April 30th, 2026

एक टेंडर ऐसा भी, डीएफओ इन , डीसीएफ आउट ।।

वैसे तो यह कोई नई बात नहीं है जब टेंडर ऐसी शर्तों के साथ निकाला जाए जिससे किसी एक खास, चहेते, व्यक्ति विशेष को थाली में सजा कर परोस दिया जाए। हम बात कर रहे हैं छत्तीसगढ़ मिनिरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड के हालिया टेंडर की , जिसे जारी करने के पहले इस बात का ध्यान रखा गया है कि यह टेंडर किसी एक इनकाम्पिटेंट व्यक्ति को दे दिया जाए ।

‘फॉरेस्ट क्लीयरेंस ‘ के इस टेंडर की अरहर्ताएं इस तरीके से डिजाइन की गई हैं की यह स्वच्छ प्रतिस्पर्धा से बाहर हो गया है । मसलन टेंडर की शर्तों पर नजर डालने पर यह बात साफ समझ में आती है कि व्यक्तिगत तौर पर भाग लेने वाला व्यक्ति वन विभाग के वन मंडल अधिकारी या उससे ऊपर की रैंक से सेवानिवृत हुआ होना चाहिए ।

फिर एक अजीबो गरीब बात यह है कि वह व्यक्ति लगभग 5 साल तक वन मंडल अधिकारी के तौर पर काम किया हुआ हो और उसको सेवानिवृत होकर भी 31 अगस्त 2025 तक 5 साल हो चुके हो । यही नहीं बिडर 31 अगस्त 2025 तक फॉरेस्ट क्लीयरेंस के पांच प्रोजेक्ट बनाने का अनुभव रखता हो और गवर्नमेंट आफ इंडिया, मिनिस्ट्री ऑफ़ एनवायरनमेंट , फारेस्ट एंड क्लाइमेट चेंज से क्लियर भी करा चुका हो । साथ ही विगत तीन वित्तीय वर्ष में कम से कम 40-40 लाख रुपए के कार्य संपादित कर चुका हो ।


क्या आपको नहीं लगता कि टेंडर की शर्तें किसी एक व्यक्ति विशेष के लिए बनाई गई हैं , यानी जो डीएफओ 4 साल पहले रिटायर हुआ हो वह इसमें भाग नहीं ले सकता या 5 साल पहले रिटायर हुए डीएफओ के पास 40 लाख का वित्तीय अनुभव कहाँ से होगा । प्रदेश में काम कर रहे अनुभवी सेवानिवृत्ति प्राप्त डीएफओ और डीसीएफ टेंडर प्रक्रिया से स्वतः बाहर हो गए हैं और यह टेंडर प्रक्रिया , स्वस्थ ,पारदर्शी प्रतिस्पर्धा से निश्चित तौर पर अलग-थलग है । जो भ्रष्टाचार का द्योतक है । इस तरह छितापंडरिया डोलोमाइट माइनिंग प्रोजेक्ट, तहसील जैजैपुर , जिला जांजगीर चंपा सक्ति का यह टेंडर शुरू से ही विवादों में पड़ गया है। इति ।।

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