Monday, October 12th, 2026

सुकमा तेंदूपत्ता धनराशि गबन – वमंडलाधिकारी से जुड़ा मामला

क्या है पूरा घोटाला?
सुकमा जिले में 2021 और 2022 सीजन के तेंदूपत्ता बोनस/पारिश्रमिक में करीब 7 करोड़ रुपये का गबन हुआ। यह पैसा तेंदूपत्ता संग्राहकों को मिलना था, लेकिन अफसरों-प्रबंधकों ने आपस में बांट लिया। बिना उच्चाधिकारियों की मिलीभगत के संभव नहीं।



DFO की भूमिका
– सुकमा के तत्कालीन वन मंडल अधिकारी अवार्डी IFS अशोक कुमार पटेल को 17 अप्रैल 2025 को ACB/EOW ने गिरफ्तार किया।
– आरोप: वन विभाग के अधिकारियों और लघु वनोपज समितियों के प्रबंधकों से मिलीभगत कर संग्राहकों का पैसा गबन किया।
– EOW ने कोर्ट में 4500 पन्नों की चार्जशीट पेश की। इसमें वनमंडल अधिकारी को रुपये 91.90 लाख रुपये मिलने का जिक्र है।
– DFO को निलंबित कर 28 अप्रैल तक EOW रिमांड पर भेजा गया था।

कितना पैसा बंटना था, कितना गायब हुआ?
– 2021: 31,356 संग्राहकों को कुल रुपये 4.53 करोड़, 2022: 18,918 संग्राहकों को कुल रुपये 3.32 करोड़ बांटा जाना था।
– 11 समितियों – सुकमा, फूलबगड़ी, दुब्बाटोटा, जगरगुंडा, मिचीगुड़ा, बोड़केल, कोंटा, जग्गावरम, गोलापल्ली, किस्टाराम, पालाचलमा – ने राशि वितरित ही नहीं की ।
– अब तक रुपये 3.92 करोड़ के गबन की पुष्टि की गयी है।
कौन-कौन गिरफ्तार हुए ?
ACB/EOW ने 27 जून 2025 को 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया , जिनमे से 4 वनकर्मी – डिप्टी रेंजर चैतुराम बघेल, देवनाथ भारद्वाज, पोडियामी इदिमा और वन रक्षक मनीष कुमार बारसे गिरफ्त में लिए गए । तेंदूपत्ता समिति प्रबंधक पायम सत्यनारायण, मो. शरीफ, सीएच रमना आदि भी गिरफ्तार किये गए ।

छापेमारी में क्या क्या मिला?
– सुकमा स्थित वन मंडलाधिकारी कार्यालय के कर्मचारी राजशेखर पुराणिक के घर से रुपये 26.63 लाख नगद बरामद किये गए ।
– पूर्व विधायक के घर समेत 12 अन्य ठिकानों पर ACB/EOW की छापे मारी की गयी । जांच में सामने आया कि गबन की राशि का हिस्सा स्थानीय नेताओं और पत्रकारों तक भी पहुंचा। उच्चाधिकारियों की संलिप्तता की भी आशंका है।

अभी स्थिति
– DFO निलंबित और जेल से रिहा । 11 समितियों के प्रबंधक हटाए गए, संचालक मंडल भंग।
– सरकार ने कहा: बचे संग्राहकों की गिनती कर भुगतान किया जाएगा, दोषियों पर कठोर कार्रवाई होगी। अब तक नहीं हुई।
– इस साल भी पुराने ढर्रे पर संघ।
यह घोटाला कांग्रेस सरकार के समय का बताया जा रहा है। EOW का कहना है कि बोनस को नगद में देने के नियम का फायदा उठाकर समितियों से पैसा निकालकर बंदरबांट की गई।

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