छत्तीसगढ़ की पुरानी राजधानी रायपुर में दो महत्वाकांक्षी योजनाएं चल रही थी । एक योजना पूर्व मंत्री के जिद की वजह से और दूसरी योजना लगभग 2 लाख की आबादी को सुगमता से यातायात उपलब्ध कराने के लिए। पहले योजना कथित स्काईवॉक, जिसका सही नाम एलिवेटेड पेडेस्ट्रियन रोड है , बेवजह ही रायपुर शहर में थोपी जा रही है ।
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दूसरी बहुप्रतीक्षित योजना कचना आर ओ बी जो लगभग 2 लाख आबादी को राहत देने वाली है, बनकर तैयार भी हो गई और अब आवागमन शुरू भी हो गया । दोनों निर्माण एजेंसियां बहुत अच्छे और उच्च गुणवत्ता वाले माहिर ठेकेदार माने जाते हैं । जिन्हें सरकारी तंत्र में बैठे अफसर और नेता कोई मदद नहीं करते सिवाय बिल निकालने और कमीशन खाने के । यही वह मुख्य वजह है की योजनाएं अभी तक अधर में लटकी हुई है ।
पहली योजना कथित स्काईवॉक , महज सड़क पर चलने वाली आम जनता के लिए एक सुनहरा स्वप्न लेकर बनाई गई , जिसकी सैद्धांतिक सहमति भी शासन से नहीं ली गई । इसकी जगह कलेक्ट्रेट चौक से उठाकर आमा नाका तक फ्लाई ओवर बनाने की योजना पूर्व में निर्धारित थी जिसे अमली जामा नहीं पहनाया गया , और बदलकर अचानक कथित स्काईवॉक थोपा जा रहा है जिसकी उपयोगिता कैग ने भी शून्य बताई है । इस योजना के विलंबित होने से अनावश्यक रूप से खर्च भी बढ़ रहा है हाल ही में इसकी आर्बिट्रेरी का एक हिस्सा तो लाकर रख दिया गया है पर उसे लगाने की अनुमति अब तक शासन ने नहीं दी है लिहाजा लेट लतीफी चल रही है । आम जनता की गाढी कमाई के टैक्स के पैसे से खिलवाड़ किया जा रहा है । कथित स्काईवॉक आम जनता को इस साल मिलने से रहा वैसे भी वह बहु प्रतीक्षित योजना नहीं है । नाही उसमें खूबसूरती है ना ही उपयोगिता ।