Expose cg छत्तीसगढ़ में इन दिनों उत्तरी और दक्षिण भाग में जबरदस्त बारिश शुरू हो गई है, साथ ही छोटी-बड़ी नदियों में उफान आ गया है । पिछली गर्मियों में अनेक नदियों से अवैध रेत उत्खनन की जानकारी मिली है । कुछ सालों से एक नया ट्रेंड शुरू हो गया है जिसमें गर्मियों में रेत खनित करके आसपास के खेतों , सरकारी जमीनों , गांव की निस्तार की जमीनों में भी भंडारण कर लिया जाता है जिसकी अनुमति जिला प्रशासन दिया करता है। वहीं अवैध रेत उत्खनन से खनिज माफिया लाल हो रहे हैं साथ ही खनिज अधिकारी भी , जो इस प्रक्रिया में आंखें मूंदे रहते हैं या यदा कदा अखबारनवीसों की खबरों पर एक्शन लेते हुए कुछ चैन माउंटिंग मशीन और हाईवे पकड़ लिए जाते हैं । लेकिन इसका सीधा नुकसान ब्रिज कॉरपोरेशन द्वारा बनाए गए ब्रिजों पर होने वाला है यह अभी हाल ही के वर्षों में देखने को मिल रहा है । पिछले साल कुरूद मगरलोड के पास मेघा का ब्रिज भी धमतरी के रेत माफियाओं की कारस्तानी की वजह से धंस गया और 40 करोड़ का एक नया ब्रिज सैंक्शन करना पड़ा ।
अब यह कहानी सूरजपुर की है जब गैबरी नदी ब्रिज धंस गया है और अधिकारियों ने माना है की अवैध रेत उत्खनन की वजह से ऐसा हुआ है जवाब देही किसकी? जिम्मेदारी किसकी? प्रशासन क्यों मौन खड़ा है? क्यों नहीं आपके विभाग के जिम्मेदार जिला प्रशासन में खनिज विभाग के अधिकारियों की कारगुज़ारियों पर प्रश्नचिन्ह नहीं लगाते ।आखिर कब तक …….