ऐसा नहीं है कि सिर्फ वन विभाग के अधिकारी ही आदिवासी मजदूरों के निवाला खाने के एक्सपर्ट हैं। हम आपको और भी कई विभागों के उन अधिकारियों से मिलवाएंगे जिन्होंने आदिवासी मजदूरों के निवाला पर डकैती डाली है और अपने घर में दिवाली मनाई है। जी हां हम जिक्र कर रहे हैं छत्तीसगढ़ स्टेट सिविल सप्लाईज कॉरपोरेशन लिमिटेड के कनिष्ठ तकनीकी अधिकारी जिन्होंने सड़ा हुआ चावल पास कर गोदाम में इकट्ठा किया और अब जांच के बाद वह निलंबित कर दिए गए हैं। दंतेवाड़ा जिले के एरिया ऑफिसर द्वारा दिनांक 2 जनवरी 2026 को प्रदाय केंद्र गीदम में संचालनालय खाद्य के खाद्य निरीक्षक के साथ किया संयुक्त निरीक्षण उपरांत प्रस्तुत जांच प्रतिवेदन दिनांक 5 जनवरी 2026 के अनुसार गोदाम क्रमांक 6 और 7 में भौतिक रूप से पाए गए 20 स्टेको में से 18 स्टेको के चावल सैंपल में जाले के लट्ठे पाए गए जिससे सभी स्टको के चावल बस्तर के अंदरूनी आदिवासी इलाकों की उचित मूल्य दुकानों में परिवहन योग्य नहीं पाया गया सभी स्टेको के लॉट के उपार्जन श्री गैर इरादतन टोप्पो कनिष्ठ तकनीकी सहायक जिला जगदलपुर अतिरिक्त प्रभार जिला दंतेवाड़ा द्वारा किया गया। जिससे स्पष्ट होता है कि श्री टोप्पो द्वारा मानक स्तर का चावल उपार्जन नहीं किया गया तथा अपनी पदीय दायित्वों का निर्वहन ठीक से नहीं किया गया अतः श्री टोप्पो द्वारा कार्य के प्रति लापरवाही , कर्तव्य के निर्वहन में शिथिलता एवं आदेशों की अवहेलना करने के कारण टोप्पो को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। निलंबन अवधि के दौरान श्री टोप्पो को मुख्यालय जिला कार्यालय कोंडागांव में रहने की हिदायत दी गई है। निलंबन अवधि में टोप्पो को नियमानुसार जीवन निर्वहन भत्ता मिलता रहेगा , जबकि वह भी नहीं मिलना चाहिए। जिस व्यक्ति ने आम बस्तरिया आदिवासियों को सप्लाई किए जाने वाले चावल के सैंपल अमानक होने के बाद भी पास कर दिए , उसे जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता से वंचित रखा जाना चाहिए , होना तो यह चाहिए कि वही जले के लट्ठे वाले चावल उसके घर भिजवाए जाएं और उसे खाने पर मजबूर किया जाए।